लॉकडाउन 2.0 की नई गाइडलाइन में प्लंबर-मैकेनिक, ढाबे को छूट… आम आदमी की जिंदगी पर पड़ेगा सीधा असर

कोरोना वायरस के कहर के मद्देनजर सरकार ने ऑल इंडिया लॉकडाउन के दूसरे चरण के लिए बुधवार को नई गाइडलाइन्स जारी की। कोरोना वायरस के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए ज्यादातर चीजों पर पहले की तरह ही रोक रहेंगी, मगर ‘जान भी और जहान भी’ के वाक्य को चरितार्थ करते हुए लॉकडाउन के दौरान सरकार ने कुछ ऐसी चीजों की भी मंजूरी दी है, जिसका हर आम आदमी की जिंदगी पर सीधा पड़ेगा।

सरकार की नई कोरोना लॉकडाउन गाइडलाइन के मुताबिक, 20 अप्रैल से स्व-रोजगार में लगे इलेक्ट्रिशियंस, आईटी संबंधी मरम्मत का काम करने वाले लोगों, प्लंबर, मोटर मैकेनिक, बढ़ई को काम करने की अनुमति दी जाएगी। इसके अलावा, ई-कॉमर्स ऑपरेटरों द्वारा उपयोग की जाने वाली कूरियर सेवाओं और वाहनों को भी सरकार द्वारा अनुमति दी गई है।

सरकार की गाइडलाइन के मुताबिक, किराना और आवश्यक वस्तुओं की दुकानें पहले की तरह ही खुली रहेंगी और इनके बंद और खुलने के समय पर कोई पाबंदी नहीं होगी। किराने का सामान, स्वच्छता से संबंधित चीजें, फल और सब्जियां, डेयरी और दूध, मुर्गी पालन, मांस और मछली, पशु चारा चारा की दुकानें खुली रहेंगी। इन्हें बस सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना होगा। माल ढुलाई वाली गाड़ियों पर भी कोई पाबंदी नहीं होगी। आयुष केंद्रों, प्रयोगशालाओं, पशुचिकित्सा केंद्रों सहित सभी मेडिकल शॉप्स को भी गैर कंटेनमेंट जोन में खोलने की अनुमति दी गई है। यानी दवा की दुकानों और क्लीनिक खोलने की इजाजत रहेगी।

हाईवे में ढाबा यानी खाने-पीने की दुकानों को भी खोलने की अनुमति दे दी गई है। हालांकि, इन्हें सोशल डिस्टेंसिंग का सख्ती से पालन करना होगा। खेती से जुड़े कामों को भी छूट दी गई है। किसानों के औजार बनाने वाली दुकानें भी खुलेंगी। सरकार ने आवश्यक सेवाओं के लिए आवाजाही की मंजूरी दी है। बैंक शाखाएं, एटीएम, पोस्टल सेवा, पोस्ट ऑफिस खुले रहेंगे। सेबी और बीमा कंपनियां को भी अनुमति दे दी गई है। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को राष्ट्र के नाम संबोधन में कोरोना महामारी के बढते प्रकोप के मद्देनजर लॉकडाउन की अवधि तीन मई तक बढाने का ऐलान किया था। लॉकडाउन की पहले घोषित अवधि मंगलवार को समाप्त होनी थी।

मंत्रालय ने आदेश में यह भी कहा है कि 20 अप्रैल से शुरू की जाने वाली अतिरिक्त चुनिंदा गतिविधियों के बारे में निर्णय संबंधित राज्य और केन्द्र शासित प्रदेश लेंगे। इसका निर्णय अन्य दिशा निदेर्शों के पालन के मूल्यांकन के आधार पर किया जायेगा।

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